देवो के देव तुम महादेव

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

देवो के देव तुम महादेव,

देखूं में जहां तुम वहां देव,

मेरे रग रग में हो भोलेनाथ,

तुम चलो साथ चलूं जहां देव.....

तुम नीलकंठ तुम हरिकंठ ,

तुम हरी हरी विषभरी कंठ,

तुम शंकर हो तुम सर्वदेव,

तुम विष से नीली करी कंठ,

मेरे शंभूनाथ मेरे भोलेनाथ,

तेरे बिन में जाऊं कहां देव,

देवो के देव तुम महादेव,

देखूं में जहां तुम वहां देव,

मेरे रग रग में हो भोलेनाथ,

तुम चलो साथ चलूं जहां देव……

तुम हो गिरीष, तुम शास्वत,

तुम रुद्र रुद्र, तुम साक्षत,

तुम त्रिलोकेश, तुम ब्योमकेश,

नाथों के नाथ तुम महानाथ,

तुम सोम सोम सर्वज्ञ देव,

कर दे ना गलतियां क्षमा देव,

देवो के देव तुम महादेव,

देखूं में जहां तुम वहां देव,

मेरे रग रग में हो भोलेनाथ,

तुम चलो साथ चलूं जहां देव….

तू मस्त मलंग, तू पिए भंग,

तू हें भगतों के अंग संग ,

तेरे राज में भोले मौज करे

तेरे मस्तीका है चढ़ा रंग,

जब तक तू है कोई फिकर नहीं,

किसी और का कोई जिक्र नहीं,

मेरे साथ साथ तू रहा देव,

देवो के देव तुम महादेव

देखूं में जहां तुम वहां देव

मेरे रग रग में हो भोलेनाथ

तुम चलो साथ चलूं जहां देव……

अब तु हीं मेरा सहारा है,

तेरे बिन न कोई हमारा है,

मेरा हाथ न भोले छोड दियों,

बिन तेरे नहीं गुजारा है,

तेरे प्यार की भोले लगी लगन,

तुझमेही हरपल रहूं मगन,

देवो के देव तुम महादेव,

देखूं में जहां तुम वहां देव,

मेरे रग रग में हो भोलेनाथ,

तुम चलो साथ चलूं जहां देव….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।