भोले ने समाधी तोड़ी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले ने तैयारी कर ली हरिद्वार के लिये,

मंदिर पर बैठ के चल दिए मौज बहार के लिए…..

भोले ने बहुत समझाई,

गौरा की समझ ना आई,

वो बोली भाँग तब घोटूँ करवा दो मेरी घुमाई,

भोले ने समधी तोड़ी अपनी गौरा के लिए,

नन्दी पे बैठ……

मुझे देदो भाँग का लोटा उठा लो कुण्डी सोटा,

और बैठ के गंगाकिनारे आनंद से पी लें लोटा,

शिव पार्वती जी आये जग उधार के लिए,

नन्दी पे बैठ……

भोले मंद मंद मुस्काए गौरा फूली ना समाए,

गंगा माँ के दर्शन को महादेवधरा पे आए,

भोलागौरा माँ लाए हरिद्वार के लिए,

नन्दी पे बैठ……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।