अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे,

जिस हाल में रखे माँ उस हाल में जी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे,

जिस हाल में रखे माँ उस हाल में जी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे...

दुनिया से क्या मांगे वो देगी तो क्या देगी,

दुनिया से क्या मांगे वो देगी तो क्या देगी,

हमने जो लेना है माँ तुमसे ही लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे,

जिस हाल में रखे माँ उस हाल में जी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे...

ये फूल भी तेरे है कांटे भी तेरे है ,

ये फूल भी तेरे है कांटे भी तेरे है ,

तुम अपनी खुशी से माँ जो दोगी वही लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे ,

जिस हाल में रखे माँ उस हाल में जी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे...

कई बार पुकारा माँ कई बार किये सजदे,

कई बार पुकारा माँ कई बार किये सजदे,

कल किसने देखा है जो लेंगे अभी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे ,

जिस हाल में रखे माँ उस हाल में जी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे...

ये दिल भी तेरा है ये जान भी तेरी है ,

ये दिल भी तेरा है ये जान भी तेरी है ,

माँ कैसे सोच लिया,

माँ कैसे सोच लिया हम तुम बिन जी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे,

जिस हाल में रखे माँ उस हाल में जी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे...

चंचल तेरे दर को ना छोड़ के जाएंगे,

चंचल तेरे दर को ना छोड़ के जाएंगे,

तुमसे ही दर लिया तुमसे ही खुशी लेंगे,

अश्कों को पी लेंगे होठों को सी लेंगे ,

जिस हाल में रखे माँ उस हाल में जी लेंगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
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नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।