परमपूज्य श्री बालकृष्ण दास जी महाराज 'प्रातः कालीन आरती'

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय अलि व्रज रस सिन्धु विहारिणि ।

जन जन के त्रय ताप निवारिणि ।।

श्यामचन्द्र की नित्य चकोरी,

महाभाव की अद्भुत लहरी ।

वेणु कुञ्ज की जीवन मूरी,

करुणा की झर झर निरझरनि ।।१।। जय अलि ।।

रूप गर्विता मन अभिरामिनि,

प्रेम नेम की गूढ़ उपासिनि ।

रस भीनि अलि नित्य नवीनि,

निज जन मानस कुमुद विकासिनि ||२|| जय अलि ।।

नित नव केलि विलास विनोदिनि,

नव निकुञ्ज रस मत्त मरालिनि ।

नव घन नील अचल सौदामिनि,

प्रिय 'शशि' वदन सुहास प्रसारिणि ।। ३ ।। जय अलि ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।