जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले......

बिगड़ा मुकदर मेरा,

पल में संवारा है,

डूबी हुई कश्तियो को,

दे दिया किनारा है,

मेरे हो गये निराले ठाठ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले........

सांवरे के बिन मुझे,

कोई नहीं भाता है,

मेरा मेरे सांवरे से,

प्रेम का ही नाता है,

बांधी सांवरे ने प्रेम की ये गांठ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले........

तेरी पायलिया पे बाजे मुरलिया,

तेरी पायलिया पे बाजे मुरलिया,

अरे छम छम छम छम छम,

छम छम नाचे गिरधारी,

गुलाम तेरो बनवारी,

अरे सुन बरसाने वारी,

गुलाम तेरो गिरधारी........

सांवरे के जैसा कोई,

और नहीं देखा है,

बिगड़ी हुई किस्मतो की,

बदले ये रेखा है,

अब तो मौज में कटे दिन रात,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले.......

चित्र विचित्र का यार ये पुराना है,

मेरे दिलदार का तो पागल जमाना है,

हम गरीबों की बढ़ा दी औकात,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले........

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ,

हो गई मेरी बल्ले बल्ले........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।