साँसों की माला पे

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( के आ पिया इन नैनन में,

जो मैं पलक ढाप तोहे लूं,

आ पिया इन नैनन में,

जो मैं पलक ढाप तोहे लूं,

ना मैं देखूं गैर को,

ना तोहे देखन दूं,

ना मैं देखूं गैर को,

ना तोहे देखन दूं,

की अब किस्मत के हाथ है,

की अब किस्मत के हाथ है,

प्यारे इस बंधन की लाज,

मैंने तो मन रख दिया,

मैंने तो मन रख दिया,

सांवरिया के पास। )

साँसों की माला पे,

सिमरूं मैं, पी का नाम,

मेरे मन की मैं जानू,

और पी के मन की राम,

साँसों की माला पे,

सिमरूं मैं पी का नाम,

मेरे मन की मैं जानू,

और पी के मन की राम,

साँसों की माला पे,

सिमरूं मैं पी का नाम,

साँसों की माला पे,

सिमरूं मैं पी का नाम.......

तू मेरा यार है,

मेरा दिलदार है,

ओ काली कमली वाला,

मेरा यार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है.......

जय जय श्री राधे,

जय जय श्री राधे….

ओ काली कमली वाला,

मेरा यार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है….

ओ काली कमली वाला,

मेरा यार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है.......

तू मेरा यार है,

मेरा दिलदार है,

ओ काली कमली वाला,

मेरा यार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है.......

तू मेरा मैं तेरा प्यारे,

ये जीवन अब तेरे सहारे,

तेरे हाथ इस,

जीवन की पतवार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है.......

तू मेरा यार है,

मेरा दिलदार है,

ओ काली कमली वाला,

मेरा यार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है........

साँसों की माला पे,

सिमरूं मैं, पी का नाम,

मेरे मन की मैं जानू,

और पी के मन की राम,

साँसों की माला पे,

सिमरूं मैं, पी का नाम,

मेरे मन की मैं जानू,

और पी के मन की राम….

ओ काली कमली वाला,

मेरा यार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है….

ओ काली कमली वाला,

मेरा यार है,

मेरे मन का मोहन,

तू दिलदार है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।