परमपूज्य श्री बालकृष्ण दास जी स्तुति

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सरसिज मधुरास्यं पञ्चकेशाभिकाश्य

'अलि' - ललितमुपास्यं शीतलं नन्दहास्यम् ।

प्रियतम - रति-रासे वेणु कुञ्जाधिवासे

मधुर-रस- विलासं श्री बालकृष्णं नमामि ॥१॥

प्रेमोल्लास-विलास-गीति मुखरैर्भृगैर्शतेर्भूषिता

भाव-स्निग्ध- सुगन्ध-घी-सुमनसां वृन्दैः सदाराधिता।

तन्वी-श्याम-तमाल-लग्न-मधुरा कुञ्जोदरे सुन्दरे

नृत्यन्ती रस-वल्लरी विजयते श्री बालकृष्णाभिधा ॥२॥

नृत्यन्नेत्र-कटाक्ष-हास-मदिरं रूपं परं सुन्दरं

पीत्वा चक्षुमुखेन मुग्धनयना मुर्छामिता विस्मिता ।

प्रीत्या सा सरसाङ्गव्यष्टि-विकला वाष्पाकुला कम्पिता

श्यामेनाड- समाश्रिता विजयते श्री बालकृष्णाभिधा ॥३॥

आलित्वं नवमल्लिकासि कलिका बाले सुधा-मञ्जरि

भद्रं तेऽस्ति शुभागमं प्रियसखि प्राणाधिका वल्लभे ।

आश्लिष्यं प्रतिनंद्य चारू-वचनैरुत्कण्ठितै रोमभिः

कृष्णेनाभिहिता प्रिया विजयते श्री बालकृष्णाभिधा ॥४॥

कालिन्दी-पुलिने निकुञ्ज-भवने दिव्ये तु वृन्दावने

राधा-कृष्ण-विलास-हास-ललिता लीला मयि स्फूर्जतु ।

प्रेमा-भक्तिमननरुनिर्भरगतिं सद्यः प्रसादीकुरू

इत्थं त्वामप्रियाचितो विजयते श्री बालकृष्णाभिधा ॥ ५॥

॥ परम पूज्य श्री महाराज जी की जय ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।