माँ रात को सपने में श्री बाबोसा आये

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - कव्वाली

माँ रात को सपने में श्री बाबोसा आये,

फिर प्यार से वो सर पे मेरे हाथ घुमाये,

माँ रात को सपने में......

कल रात मैंने देखी उनकी प्यारी सी सूरत,

उसे देखने को माँ मेरा अब जी ललचाये,

माँ रात को सपने में......

एक बार मुझे ले चल श्री बाबोसा के दर पे,

ये सपना सच हो जाये, मुझे दर पर जो जाये,

माँ रात को सपने में......

ओ मैया मेरी सुनले कल रात का नजारा,

सिरहाने वो खड़ा था माँ छगनी का दुलारा,

सर पे मुकुट था जिनके हाथो में घोटा धारे,

देखा है जबसे उनको ये नैन हुए मतवारे,

एक टक निहार रहे थे, उनको ये मेरे नैन,

अब दर्श बिना उनके, मुझे आये न चैन,

माँ रात को सपने में......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।