सतगुरु जी का शुक्र मनाइए

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॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु जी का शुक्र मनाइए,

जो वंडदे दिन रात खुशियां,

बापू अपने तो वारे वारे जाईए,

जो वंडदे दिन रात खुशियां......

सारी दुनिया दा एह दुःख हरना,

एहदा काम है जहान सुखी करना,

एहदे दर तो नसीब नू जगाइये,

सतगुरु जी का शुक्र मनाइए......

पाके नज़र निहाल करि जा रया,

बिन मंगे ही ख़ज़ाने भरी जा रया,

कदे एहदे अहसान ना भुलाइये,

सतगुरु जी का शुक्र मनाइए......

पूजा जिस घर विच होवे सच दी,

पाके झांजरा ता ओथे खुशी नचदी,

हथौ पल्ला एहदे असी ना छुडाईये,

सतगुरु जी का शुक्र मनाइए......

भक्तों तकलो खोल खोल अखियां,

सांभ सांभ के सुगाता एहने रखिया,

एहदी रेहमता नू असि ना भुलाईये,

सतगुरु जी का शुक्र मनाइए......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।