गुथली खोल दातीऐ हुण ते साड़ी वारी आई

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर दे झोली अड्ड के जिसने अलख जगाई,

हे महामाईऐ तू ते ओस दी बिगङी गल बनाई,

गुथली खोल दातीऐ हुण ता साड़ी वारी आई,

गुथली खोल दातीऐ हुण ता साड़ी वारी आई,

जेङे वी झुकदे तेरे द्वारे ,

तू माँ बाँ फङ फङ तारे ,

चँगे तारे मन्दे तारे ,

जन्म जन्म दे गन्दे तारे ,

जदो दयालु तू माँ होई ,

मैली चादर सब दी धोई,

कर्मावाले असीं वी रह गये दिती असां दुहाई,

गुथली खोल दातीऐ हुण ते साड़ी वारी आई,

असां जो मगंया क्युं घबराई ,

ऐडी केङी आफत आगई,

तेरे खजाने थोड है काहदी,

सोचन दी माँ लोड है काहदी ,

सांनु इनां क्युं तरसावे,

हथ तू पिछे खिची जावे,

महेरा दा छिटां ऐदर पादे कुझ नही कढणां माँये,

गुथली खोल दातीऐ हुण ते साड़ी वारी आई,

तू दाती तेनु केहना,

सब ने लिया आसा वी लेना,

झिड़का दे या मार ले थके,

असी वी माँ तीठ आ पाके,

कदे वी तेरा लढ़ नी चड़ना,

मर के वी एहे दर नही चड़ना,

आसी वी तेरे अपने माइये तू वि नही परायी,

गुथली खोल दातीऐ हुण ते साड़ी वारी आई,

हुन ता साडे दिन पलता दे,

जो चार मुठिया एहदर पा दे,

सजे पा दे खबे पा दे,

आगे पा दे पीछे पा दे,

असी जीना तेरे भरोसे,

माँ पुतरा दे काहदे रोसे,

रोकिया किसने माँ हाथ तेरा तू दुनिया दी माई,

गुथली खोल दातीऐ हुण ते साड़ी वारी आई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।