मैया मेरी साठ लाख की लॉटरी खुलवा दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया मेरी साठ लाख की,

लॉटरी खुलवा दे शेरांवाली

खुलवा दे शेरांवाली,

खुलवा दे लांटावाली……

मेरे गले मे चेन पड़ी हो

दरवाजे कार खड़ी हो

मैया तेरे आऊं सालों साल

खुलवा दे शेरांवाली,

मैया मेरी साठ लाख की,

लॉटरी खुलवा दे शेरांवाली

खुलवा दे शेरांवाली,

खुलवा दे लांटावाली……

मेरा इक बनवा दो बंगला

बंगले में छिका हो जंगला

मैया तेरी पूजा करूँ दिन रात,

मैया मेरी साठ लाख की,

लॉटरी खुलवा दे शेरांवाली

खुलवा दे शेरांवाली,

खुलवा दे लांटावाली……

तेरा जगराता करवाऊं

तेरा भंडारा करवाऊं

मैया तेरी कंजके जिमाऊं हर साल,

मैया मेरी साठ लाख की,

लॉटरी खुलवा दे शेरांवाली

खुलवा दे शेरांवाली,

खुलवा दे लांटावाली……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।