कुंडा खोल दे भवानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के,

ऊँचा कर के भवानी हाथ ऊँचा कर के.....

मैं बाजार जाउंगी मैया की पायल लाऊंगी,

दोनों हाथों से पहनाऊँगी पहाड़ चढके,

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के.....

मैं बाजार जाउंगी मैया की लेहंगा लाऊंगी,

दोनों हाथों से पहनाऊँगी पहाड़ चढके,

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के......

मैं बाजार जाउंगी मैया की चूड़ी लाऊंगी,

दोनों हाथों से पहनाऊँगी पहाड़ चढके,

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के......

मैं बाजार जाउंगी फूलों का हार लाऊंगी,

दोनों हाथों से पहनाऊँगी पहाड़ चढके,

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के.....

मैं बाजार जाउंगी मैया के कुण्डल लाऊंगी,

दोनों हाथों से पहनाऊँगी पहाड़ चढके,

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के.....

मैं बाजार जाउंगी मैया की नथनी लाऊंगी,

दोनों हाथों से पहनाऊँगी पहाड़ चढके,

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के.......

मैं बाजार जाउंगी मैया का टिका लाऊंगी,

दोनों हाथों से पहनाऊँगी पहाड़ चढके,

कुंडा खोल दे भवानी हाथ ऊँचा कर के......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।