जग जननी माँ ज्योतां वाली

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय माँ, जय जय माँ, जय जय माँ, तेरी सदा ही जय ll

जग जननी माँ, ज्योतां वाली, जगमग ज्योत जगे,

धरती अर्श, पाताल त्रिलोकी, नूरो नूर करे,,,

नूरो नूर करे,,, नूरो नूर करे,,, ll

जय माँ,,, जय माँ,,, जय माँ,,, जय माँ,,, बोलो रे बोलो l

जय जय माँ, जय जय माँ, जय जय माँ, तेरी सदा ही जय ll

नैनों में हैं, नैना देवी, मन में मनसा रानी,

चिन्तपुरनी माँ, चित में बस्ती, "बाँहों में है भवानी" ll

सांसों में, संतोषी माता, कष्ट कलेश हरे,

धरती अर्श, पाताल त्रिलोकी, नूरो नूर करे,,,

नूरो नूर करे,,, नूरो नूर करे,,,

जग जननी माँ, ज्योतां वाली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

बुद्धि में है, शीतला रानी, जिहवा में है सरस्वती,

मस्तक में है, माँ चामुण्डा, "दिल में है माँ शक्ति" ll

विषया विकार, अहंकार क्रोध को, ज्वाला भस्म करे,

धरती अर्श, पाताल त्रिलोकी, नूरो नूर करे,,,

नूरो नूर करे,,, नूरो नूर करे,,,

जग जननी माँ, ज्योतां वाली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

अन्नपूर्णा, भरे भंडारे, माँ के खेल न्यारे,

शंकर के, अंग संग गौरजां, लक्ष्मी विष्णु द्वारे ll

नारद सारद, और ब्रह्मा, हाज़री रोज़ भरे,

धरती अर्श, पाताल त्रिलोकी, नूरो नूर करे,,,

नूरो नूर करे,,, नूरो नूर करे,,,

जग जननी माँ, ज्योतां वाली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

कात्यानी और, काली कमला, वैष्णों शेराँवाली,

मेहरों की, बरसात करे, "मईया झण्डे वाली" ll

कण कण में, वो विराजे मईया, हर मन वास करे,

धरती अर्श, पाताल* त्रिलोकी, नूरो नूर करे,,,

नूरो नूर करे,,, नूरो नूर करे,,,

जग जननी माँ, ज्योतां वाली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।