तू ही तू तू ही तू सांई

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॥ पावन पाठ ॥

तू ही तू तू ही तू सांई ॥

हर शेह में समाया तू साईं,कण कण में तेरी खुशबू साईं,

तेरा ही तेरा सोहे हर तरफ तोहे देखू साईं,

तू ही तू तू ही तू सांई

परिवार हमारा तू साईं,

घरबार हमारा तू साईं,

करतार हमारा तू साईं,

तू ही तू तू ही तू सांई

भगवान को मने तू साईं,

अल्लाह को जाने तू साईं,

रब को पहचाने तू साईं,

सबको कामने तू साईं,

तू ही तू तू ही तू सांई

भव सिन्धु की धरा,

तू दुबे का किनारा,

माझी भी हमारा तू साईं,

साहिल का सहारा तू साईं,

तू ही तू तू ही तू सांई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।