आना जी मेरे घर आना मेरे बांके बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आना जी मेरे घर आना मेरे बांके बिहारी,

बांके बिहारी मेरे रमण बिहारी......

छोटी सी कुटिया में छोटा सा परिवार है,

आना जी आना प्यारे तेरा इंतजार है,

देखो भूल ना जाना मेरे बांके बिहारी,

आना जी मेरे घर आना मेरे बांके बिहारी......

जितना दिया है तूने बहुत दिया है,

तुमने तो जीवन में रंग भर दिया है,

बहुत दिया है बहुत दिया है,

तेरा दिल से करूं शुक्राना मेरे बांके बिहारी,

आना जी मेरे घर आना मेरे बांके बिहारी.....

मेरे घर कुछ कमी नहीं है,

माखन मिश्री दूध दही है,

ओ कमी नहीं है दूध दही है,

अब ना लगाना बहाना मेरे बांके बिहारी,

आना जी मेरे घर आना मेरे बांके बिहारी......

ला दूंगी तोहै बांस की पोरी,

मंगवाई दूंगी लाला नूपुर की जोड़ी,

औ नूपुर की जोड़ी है नूपुर की जोड़ी,

और मेरे अंगना में ठुमका लगाना मेरे बांके बिहारी,

आना जी मेरे घर आना मेरे बांके बिहारी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।