मैया तुम तो वरदानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी,

इस अंधेरी रातों में,

रोशनी जलाओगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी......

क्या करूगी मैं आखिर,

दर पे माँ तेरे आकर,

पास मेरे कुछ भी ना,

क्या तुम्हें खिलाऊगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी.......

तू बड़ी दयालु है,

सबकी बात सुनती है,

सूनी पड़ी बगिया में,

फूल कब खिलाओगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी......

गुल खिलेगा गुलशन में,

माँ मुझे बुलायेगी,

दर पे माँ के आया हूं,

गोद में सुलाओगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी........

धूल तेरे चरणों की,

सिर पे माँ लगाऊंगी,

होठों से चूमूगी,

माथे पे सजाऊगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी........

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी,

इस अंधेरी रातों में,

रोशनी जलाओगी,

मैया तुम तो वरदानी,

पास कब बुलाओगी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।