खोलो खोलो भवन के द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खोलो खोलो भवन के द्वार,

सवाली आये है,

करदो करदो सब का उद्धार,

सवाली आये है.....

ऊंचे पर्वत भवन निराला,

बीच गुफा में माँ ने डेरा डाला,

माँ के चरणों में गंगा की धार,

सवाली आये है,

खोलो खोलो भवन के द्वार,

सवाली आये है......

तेरे भवन की शोभा न्यारी,

भक्तों को माँ लगती प्यारी,

कब से बैठे है, रास्ता निहार,

सवाली आये है,

खोलो खोलो भवन के द्वार,

सवाली आये है......

तेरे दर्शन को अखियां तरसे,

नैना मेरे कब से बरसे,

आज रवि की सुन लो पुकार,

सवाली आये है,

खोलो खोलो भवन के द्वार,

सवाली आये है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।