अब कायन को कल्पे मुरख

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अब कायन को कल्पे मूरख परदेसी कोई आया रे,

परदेसी कोई आया मुसाफिर परदेसी कोई आया रे.....

एक बूंद की रचना सारी, गया बून्द बहु तेरा रे,

गया बून्द का खोज न करियो, गया बून्द क्यों रोया,

मुसाफिर परदेसी कोई आया रे,

अब कायन को कल्पे मूरख......

माता कहे की पुत्र मेरा पुत्र कहे मेरी माता रे,

या ठगनी ने कही घर ठगिया, इनका केसा नाता,

मुसाफिर परदेसी कोई आया रे,

अब कायन को कल्पे मूरख.....

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी संग कछु नहीं जाता रे,

क्या करे शीपन का मोती, लाखो हीरा खोया,

मुसाफिर परदेसी कोई आया रे,

अब कायन को कल्पे मूरख.....

चंदा सूरज दो बाजु कहिये कोट महान उजियारो रे,

कहे जन दल्लू सुनो भाई साधो साँझ नहीं सवेरा,

मुसाफिर परदेसी कोई आया रे,

अब कायन को कल्पे मूरख.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।