खाटू वाले तू मेरी जान

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बोल नीले घोड़े वाले की जय

मैं सूं तेरे प्यार का रोगी,

सांसों में तेरा नाम,

दिल चाहे बस देखूं तुझे मैं,

तेरी निराली है शान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ प्यारे तू है मेरी जान......

अपने भी रंग बदलगै बाबा,

यहां ना अपना कोई,

बैरागी मैं तेरा हो लिया,

सूरत मन ने मोही,

अपने भी रंग बदलगै बाबा,

यहां ना अपना कोई,

बैरागी मैं तेरा हो लिया,

सूरत मन ने मोही,

दुनिया की मन परवाह ना,

बस चहिये तेरा साथ,

भक्ति में तेरी डूबा रहूं,

चाहे मान तू या ना मान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ प्यारे तू है मेरी जान.......

धन दौलत रै दुनिया कमाती,

मैंने तुझे कमाया,

छोड़ के बाबा सबको मैंने,

तुझको अपना बनाया,

धन दौलत रै दुनिया कमाती,

मैंने तुझे कमाया,

छोड़ के बाबा सबको मैंने,

तुझको अपना बनाया,

महर राखिये खाटू वाले,

तेरी महिमा अपरम्पार,

मस्ती में तेरी खोया रहूंगा,

मन में ली है ठान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ प्यारे तू है मेरी जान.......

दिल दिमाग में बैठ्या तू,

तेरा मेरा अनोखा नाता,

अपने सारे भक्तों का तू,

लखदातार कहलाता,

दिल दिमाग में बैठ्या तू,

तेरा मेरा अनोखा नाता,

अपने सारे भक्तों का तू,

लखदातार कहलाता,

आकाश पंडित ठाकुर नितिन ने,

होग्या तुझे प्यार,

अंकित पबला ए के गर्ग भी,

गये तुझे पहचान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ प्यारे तू है मेरी जान.......

जी चावे से मेरा,

हरदम तुझसे मैं बतलाऊँ,

अपने सुख दुख की गाथा मैं,

तुझे सुनाता जाऊं,

जी चावे से मेरा,

हरदम तुझसे मैं बतलाऊँ,

अपने सुख दुख की गाथा मैं,

तुझे सुनाता जाऊं,

अपने दिल के कोने में बाबा,

मुझको लो उतार,

अमित बैंसला करता रहेगा,

तेरा सदा गुणगान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ प्यारे तू है मेरी जान.......

मैं सूं तेरे प्यार का रोगी,

सांसों में तेरा नाम,

दिल चाहे बस देखूं तुझे मैं,

तेरी निराली है शान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ खाटू वाले तू मेरी जान,

खाटू वाले तू मेरी जान,

ओ प्यारे तू है मेरी जान......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।