बाजे रे डंका लखदातार का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बाजे रे बाजे रे डंका लखदातार का.....

फूलन की चौकी लागि,

फूलन के गुच्छ सोहे,

फूलन की माला,

बिच में कतार है,

फूलन से सज रह्यो,

आज ये दरबार आली,

फूलन की हो रही,

आज ये बहार है।

फूलन के बिच रथ,

चाँद को बिराज रह्यो,

जा की छवि बरनी ना जाए,

अपरम्पार है,

चंदा के रथ पर,

चंदा सो प्यारो मेरो,

साज रह्यो सजनी,

लखदातार है.......

बाजे रे बाजे रे डंका,

लखदातार का,

लखदातार का,

मेरी सरकार का,

बाजें रे बाजें रे डंका,

लखदातार का.....

चलो रे चलो भैया,

खाटू नगरीया,

वहां बैठ्यो है,

मेरो सांवरिया,

कर रह्यो ध्यान,

तेरे परिवार का,

बाजें रे बाजें रे डंका,

लखदातार का......

भाव को भूखो,

मेरो सांवरिया,

सब पर करे,

करुणा की नजरिया,

पाया नहीं पार उस,

पालनहार का,

बाजें रे बाजें रे डंका,

लखदातार का.......

शान से आवे,

निशान चढ़ावे,

श्याम अपने भक्तों का,

मान बढ़ावे,

कोई नहीं जोड़ उस,

करुणा अवतार का,

बाजें रे बाजें रे डंका,

लखदातार का.......

पग पग पे 'बावरी' को,

तेरा ही सहारा,

हमें डर क्या है जब,

तू है हमारा,

बरस रहा मेघ देखो,

बाबा के प्यार का,

बाजें रे बाजें रे डंका,

लखदातार का........

बाजें रे बाजें रे डंका,

लखदातार का,

लखदातार का,

मेरी सरकार का,

बाजें रे बाजें रे डंका,

लखदातार का......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।