नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई रे नैना नीचा करले ॥

अरे नीचा करले नैना नीचा करले,

नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई रे नैना नीचा करले

अरे गोरा गोरा हाथा में रच रही मेहंदी ॥

अरे हाए राधा झालो देर बुलावेली काई रे नैना नीचा करले,

नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई रे नैना नीचा करले,

अरे तीखा तीखा नैना में झीणो झीणो सूरमो ॥

नैना सू नैना मिलावेली काई रे नैना नीचा करले,

नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई रे नैना नीचा करले,

अरे गोरा गोरा हाथा में हरी हरी चूड़िया ॥

बहिया सू बहिया मिलावेली काई ये नैना नीचा करले,

नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई रे नैना नीचा करले,

गोरा गोरा पगल्या में बाज रही पायल ॥

थोडो सो नाच दिखावेली काई ये नैना नीचा करले,

नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई रे नैना नीचा करले,

अरे चंद्र सखी व्रज बालक की शोभा ॥

अरे हर्ष हर्ष गुण गावेली काई ये नैना नीचा करले,

नैना नीचा करले श्याम से मिलावेली काई रे नैना नीचा करले॥

" मंजीत सिंह "

पैड प्लेयर =९८८७२०३४४४

फ्रॉम =अजमेर ' राजस्थान '

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।