आओ नया साल मनाये

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - पारम्परिक

आओ नया साल मनाये,

बाबोसा की भक्ति में खो जाये,

हैप्पी न्यू ईयर....

बीते वर्ष की यादे कभी जाये न भुलाई,

बाईसा ने हर घर जाकर प्रतिस्ठा कराई,

बाईसा का अपने भक्तो पे भरोसा,

नये साल में होंगे हर घर बाबोसा,

आओ नया साल मनाये.....

झूमके जो आती बसन्त पंचमी ये प्यारी,

जन्मोत्सव बाबोसा का कलकत्ता में भारी,

बाईसा का साथ मिले मिले आशीर्वाद,

जाये न खाली जब बाबोसा हो साथ,

आओ नया साल मनाये.....

जब तक है सांस "दिलबर" खुशियाँ मनाये,

बाबोसा का दर छोड़के कहि भी न जाये,

नये साल में होंगे नये नये चमत्कार,

भक्तो को मिलेगा खुशियो का उपहार,

आओ नया साल मनाये.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।