सज धज के बैठे श्याम धणी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी,

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी.....

मकराणे को एक मंदिर है,

जग शिखर ध्वजा लहराव है,

मकराणे को एक मंदिर है,

जग शिखर ध्वजा लहराव है,

मन्दिर में श्याम का सेवकिया,

बाबा ने चंवर ढुलाव है,

मन्दिर में श्याम का सेवकिया,

बाबा ने चंवर ढुलाव है,

दर मांगणिया री भीड़ खड़ी,

दर मांगणिया री भीड़ खड़ी,

दर मांगणिया री भीड़ खड़ी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी,

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी......

बायें गोपी नाथ विराजे रे,

आगे श्याम बिहारी साजे रे,

बायें गोपी नाथ विराजे रे,

आगे श्याम बिहारी साजे रे,

मेरे श्याम धनी के आँगण में,

नित ढ़ोल नगाड़ा बाजे रे,

मेरे श्याम धनी के आँगण में,

नित ढ़ोल नगाड़ा बाजे रे,

ड्योढी पर बैठ्या बालाजी,

ड्योढी पर बैठ्या बालाजी,

ड्योढी पर बैठ्या बालाजी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी,

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी......

माथे पर मुकुट बिराजे रे,

कानों में कुण्डल साजे रे,

माथे पर मुकुट बिराजे रे,

कानों में कुण्डल साजे रे,

गल हार नोलखो रत्नां रो,

केसरियो बागो साजे रे,

गल हार नोलखो रत्नां रो,

केसरियो बागो साजे रे,

हाथां में साजे मोर छड़ी,

हाथां में साजे मोर छड़ी,

हाथां में साजे मोर छड़ी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी,

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी.......

जो नित उठ दर्शन पावे है,

बिका बाबा काम पटावे है,

जो नित उठ दर्शन पावे है,

बिका बाबा काम पटावे है,

बाबो संकी झोली भर देवे,

जो सच्चे मन से ध्यावे है,

बाबो संकी झोली भर देवे,

जो सच्चे मन से ध्यावे है,

रोमी की श्याम ने अर्ज सुनी,

रोमी की श्याम ने अर्ज सुनी,

रोमी की श्याम ने अर्ज सुनी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी,

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी.....

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी,

सज धज कर,

सज धज कर,

सज धज कर,

बैठो श्याम धणी,

मैं तो वारी जाऊं,

वारी जाऊं वारी जी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।