मैं हार के आया बाबा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आजा आजा मेरे श्याम,

आजा आजा मेरे श्याम,

मैं हार के आया बाबा,

तूने जीत दिलाई है,

मैं हार के आया बाबा,

तूने जीत दिलाई है,

सालों से जो बिगड़ी थी,

वो बात बनाई है,

सालों से जो बिगड़ी थी,

वो बात बनाई है,

अब छोड़ के दर तेरा,

मैं बाबा कहीं ना जाऊंगा,

अब छोड़ के दर तेरा,

मैं बाबा कहीं ना जाऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा.....

मैंने जबसे तुझको जाना,

गौरव हुआ तेरा दीवाना,

मैंने जबसे तुझको जाना,

हुआ तेरा दीवाना,

दुनियां के लाखों दर हैं,

मेरा तो एक ठिकाना,

दुनियां के लाखों दर हैं,

मेरा तो एक ठिकाना,

महिमा ये तेरी गा गा करके,

सबको बतलाऊंगा,

महिमा ये तेरी गा गा करके,

सबको बतलाऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा.....

अब जहां भी मैं जाता हूं,

तेरे भजनों को गाता हूं,

और इज्जत मान भी बाबा,

तेरे भक्तों से पाता हूं,

अब जहां भी मैं जाता हूं,

तेरे भजनों को गाता हूं,

और इज्जत मान भी बाबा,

तेरे भक्तों से पाता हूं,

तेरा एहसान मैं बाबा,

कैसे चुकाऊंगा,

तेरा एहसान मैं बाबा,

कैसे चुकाऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा......

आजा आजा मेरे सांवरे,

आजा आजा मेरे सांवरे…….

खाटू मैं हार के आया,

तूने अपने गले लगाया,

खाटू मैं हार के आया,

तूने अपने गले लगाया,

गौरव ने भाव से बाबा,

तेरा निशान उठाया,

गौरव ने भाव से बाबा,

तेरा निशान उठाया,

फिर जोगिया को संग लेकर,

दर पे चढ़ाऊंगा,

फिर जोगिया को संग लेकर,

दर पे चढ़ाऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा......

मैं हार के आया बाबा,

तूने जीत दिलाई है,

मैं हार के आया बाबा,

तूने जीत दिलाई है,

सालों से जो बिगड़ी थी,

वो बात बनाई है,

सालों से जो बिगड़ी थी,

वो बात बनाई है,

अब छोड़ के दर तेरा,

मैं बाबा कहीं ना जाऊंगा,

अब छोड़ के दर तेरा,

मैं बाबा कहीं ना जाऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा,

तू जब भी बुलाये खाटू में,

मैं दौड़ा आऊंगा…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।