कारोबार मेरो सांवरों चलावे

लखबीर सिंह लक्खा
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तू ही दाता, तू ही विधाता,

श्याम तू ही पालनहार,

बाबा तू ही गागर,

तू ही नैया,

तू ही खेवनहार,

एक तेरा है सहारा मुझको,

तेरा ही आधार,

तेरे ही भरोसे,

परिवार मेरा बाबा,

तेरे ही भरोसे परिवार......

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

मेरी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे,

मेरी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे,

जीमे कदे ना घाटो आवे जी,

जीमे कदे ना घाटो आवे जी,

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

म्हारी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे......

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम,

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम…….

मैं तो कीर्तन में रम जाऊं,

मेरी गद्दी पे बाबो ही विराजे,

मैं तो कीर्तन में रम जाऊं,

मेरी गद्दी पे बाबो ही विराजे,

मन चिंता फिक्र अब क्या की,

म्हारो श्याम धनी जद म्हारे सागे,

मन चिंता फिक्र अब क्या की,

म्हारो श्याम धनी जद म्हारे सागे,

लेन देन को हिसाब,

राखे हाथ मा ही आप,

मेरी रोकड़ी यो सेठ मिलावे जी,

मेरी रोकड़ी यो सेठ मिलावे जी,

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

म्हारी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे…….

मेरे धंधे में लागत कोनी,

ना रुपैया ना आनो पाई,

मैं तो गाता गाता मौज उड़ाऊं,

करू श्याम नाम की कमाई,

मेरा सेठ है लखदातार,

मेरा भरया रवै भंडार,

मेरा भरया रवै भंडार,

मेरी विपदा में आडो आवे जी,

मेरी विपदा में आडो आवे जी,

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

म्हारी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे…….

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम,

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम…….

अन्न धन लक्ष्मी को दाता,

मेरो बाबो यो खाटू वाला,

हर्ष मैं फिर क्यों सोचूं,

मेरी बगिया को बाबो है रुखालो,

लक्खा बाबा की के बात,

राखे मेरे सिर पे हाथ,

मेरो पग पग साथ निभावे जी,

मेरो पग पग साथ निभावे जी,

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

म्हारी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे…….

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम…….

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम…….

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

मेरी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे,

मेरी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे,

जीमे कदे ना घाटो आवे जी,

जीमे कदे ना घाटो आवे जी,

कारोबार मेरो सांवरों चलावे,

म्हारी बैलेंस शीट कानूड़ो बनावे…….

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम,

म्हारो सांवरों, साँवरों,

खाटू वालो श्याम……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।