मैं तो थक गई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो थक गई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी.....

हरी हरी पाती तोड़ के लाऊं,

घोट घोट तेरी भांग बनाऊ,

ऊगलिया घिस गई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी,

मैं तो थक गई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी.....

जंगल झाड़ घूम लिए सारे,

सिलबट्टा भी घिस गए हमारे,

टोकर भर लई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी,

मैं तो थक गई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी.....

पीके भांग पढ़ा रहवे तू,

मेरी सुध बुध भूल गया तू,

फीकर में रोय रही रे भोले घोट के भांग तुम्हारी,

मैं तो थक गई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी.....

बिच्छू लिपट रहे तेरे तन पै,

काले नाग लटक रहे गले में,

मैं तो डर गई रे भोले देखके नाग तुम्हारे,

मैं तो थक गई रे भोले घोट के भांग तुम्हारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।