मैं तो भूल गई भगवान

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॥ पावन पाठ ॥

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई,

मुझे नहीं रहा कुछ याद नाम तेरा भूल गई.....

नाम जपन जब मैं बैठी पड़ोसन घर आ गई,

मुढा भी डाला मैंने कुर्सी बीछाई,

मैं करने लग गई बात नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

रोटी सब्जी खाई मैंने दूध भी पिया,

खटिया बिछाई मैंने बिस्तर लगाया,

मुझे पड़ते ही आ गई नींद नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

यम के दूत मुझे लेने को आए,

थरथर कांपे मेरा दिल घबराए,

मैं तो छुप गई खटिया के नीचे नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

धर्मराज ने लेखा मांगा,

लेखा मांगा हुक्म सुनाया,

इसे पकड़ के लाओ खींच नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

धर्मराज की पेशी लागी,

पेशी लागी तारीख लागी,

फिर मांगा मेरा हिसाब नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

क्या खाया बुढ़िया,

क्या कुछ कमाया,

तूने क्या करा पुण्यदान नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

थोड़ा खाया मैंने ज्यादा कमाया,

कुछ ना किया पुण्यदान नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

झूठ प्रभु मैंने कुछ नहीं बोला,

सांची करी सारी बात नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

सास ननंद मैंने कभी ना सताई,

रखा देवर बालक समान नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

बहू को कभी बोल नहीं बोले,

रखी अपनी बेटी समान नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

गैर मर्द की तरफ ना देखो,

समझा अपना पति भगवान नाम तेरा भूल गई,

मैं तो भूल गई भगवान नाम तेरा भूल गई....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।