काशी में कैलाशी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बम भोले बम भोले

कैलाश का वासी बम भोले,

मिलता है जो काशी बम भोले,

डमरू पर नाचे झूम झूम,

कर दूर उदासी बम भोले,

मन का भोला मेरे भोले नाथ,

लगता सुंदर गौरा के साथ,

दुनिया के पालकहारी,

मेरा भोला नाथ भोला भंडारी,

करता है नंदी की सवारी,

जटा से निकले गंगा प्यारी,

भोला नाथ भोला भंडारी....

भोला नाथ भोला भंडारी,

जटा से निकले गंगा प्यारी...

पूजाती है जिनको दुनिया ये सारी,

नाम पुकारे कहे त्रिपुरारी,

माथे पे चंदा है भस्म लगाये,

नागो के माला गले में ये प्यारी,

करते हैं सबके मन में वास,

जितने अघोरी इनके दास,

मेरे नीलकंठ विषधारी,

मेरा भोला नाथ भोला भंडारी,

करता है नंदी की सवारी,

जटा से निकले गंगा प्यारी,

भोला नाथ भोला भंडारी......

हर हर महादेव…….

देवो के देवा अजब तेरी माया,

जटाधारी तू गंगा धारी कहलाया,

या भष्मासुर को भस्म तूने भोले,

उठा तू भयानक जब उसने मचाया,

मेरे दिल में जगी तेरी प्यास प्यास,

है रघुवर हर सांस सांस,

हनुमान सुमिर पुजारी,

मेरा भोला नाथ भोला भंडारी,

करता है नंदिकी की सवारी,

जटा से निकले गंगा प्यारी,

भोला नाथ भोला भंडारी…….

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।