माँ दर तेरे आये हैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली ओ मैया ज्योतावाली,

शेरावाली ओ मैया ज्योतावाली,

मेहरां वाली ओ मैया ज्योतावाली,

शेरावाली ओ मैया ज्योतावाली......

मां दर तेरे आयें हैं,

मां दर तेरे आयें हैं,

ज्योत जलायें हैं,

ज्योत जलायें हैं,

सुनेगी मां मेरी,

फरियादें लायें हैं,

सुनेगी मां मेरी,

फरियादें लायें हैं,

मां दर तेरे आयें हैं,

ज्योत जलायें हैं......

जय मां, जय मां, जय जय मां,

जय मां, जय मां, जय जय मां...

भूलों को राह दिखाये,

भटकों को मां संवारे,

भूलों को राह दिखाये,

भटकों को मां संवारे,

तेरे चरणी जो मां आये,

मां उसको गले लगाये,

ओ जग के सताये हैं,

मां दर तेरे आये हैं,

सुनेगी मां मेरी,

फरियादें लायें हैं,

मां दर तेरे आयें हैं,

ज्योत जलायें हैं......

जय मां, जय मां, जय जय मां,

जय मां, जय मां, जय जय मां.....

तू चिंता हरनी मैया,

तू दुख हरनी मैया,

तेरी कृपा का क्या कहना,

तू मेहरां वाली मैया,

पुकारें लायें हैं,

मां दर तेरे आये हैं,

सुनेगी मां मेरी,

फरियादें लायें हैं,

मां दर तेरे आयें हैं,

ज्योत जलायें हैं......

जय मां, जय मां, जय जय मां,

जय मां, जय मां, जय जय मां....

भोली मां अम्बे रानी,

सोहनी मां जग कल्याणी,

तेरी लाल लाल मां चुनरिया,

तेरी सूरत मानो रानी,

ओ झोली लायें हैं,

मां दर तेरे आये हैं,

सुनेगी मां मेरी,

फरियादें लायें हैं,

मां दर तेरे आयें हैं,

ज्योत जलायें हैं......

जय मां, जय मां, जय जय मां,

जय मां, जय मां, जय जय मां....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।