जय हो तेरी महाकाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( ॐ जयंती मंगला काली, भद्रकाली कपालिनी,

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री, "स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते lll" )

जय, काली नमः, जय, काली नमः,

जय, काली नमः, जय जय, काली नमः ll

वर दाती, कमला कलियानी ll, चार भुजायों वाली

सदा ही, जय हो तेरी महाकाली xll

नमन तुझे है, भक्त जनो की, रक्षा करने वाली

सदा ही, जय हो तेरी महाकाली xll -ll

जय, काली नमः, जय, काली नमः,

जय, काली नमः, जय जय, काली नमः ll

महिषासुर को, मार के मईया, "रणचण्डी कहलाई" l

धूम्र विलोचन, चण्ड मुण्ड का, "नाश किया महामाई" ll

धर्म ध्वजा, महाकलका ने है ll, अपने हाथ संभाली

सदा ही, जय हो तेरी महाकाली xll-ll

जय, काली नमः, जय, काली नमः,

जय, काली नमः, जय जय, काली नमः ll

शुम्भ निशुम्भ के, कोप से डरके, "देवते जब घबराए" l

महादैत्य ने, तीन लोक में, "थे उत्पात मचाए" ll

रक्त बीज़ के, रक्त की धारा ll, योगनिया पी डाली

सदा ही, जय हो तेरी महाकाली xll-ll

जय, काली नमः, जय, काली नमः,

जय, काली नमः, जय जय, काली नमः ll

जल में थल में, नील गगन में, "बिचर रही माँ अम्बे" l

पाप नाशनी, मंगल करनी, "दयावान जगदम्बे" ll

जयकारा, सब प्रेम से बोलो ll, भर लो झोली ख़ाली

सदा ही, जय हो तेरी महाकाली xll-ll

जय, काली नमः, जय, काली नमः,

जय, काली नमः, जय जय, काली नमः ll

संजय के भी, भाग जगाओ, "मन के भाग्य विधाता" l

मंदिर मंदिर, महिमा तेरी, "सुबह शाम रहे गाता" ll

दीन निमाने, कवि को अपने ll, नाम की बख्शो लाली

सदा ही, जय हो तेरी महाकाली xll-ll

जय, काली नमः, जय, काली नमः,

जय, काली नमः, जय जय*, काली नमः ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।