तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

पहले खेल रचे मोहन ने,

खुल गए जेल के ताले मोहन मुरली वाले,

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

दूजे खेल रचे मोहन ने,

जमुना ने चरण पखारे मोहन मुरली वाले,

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

तीजे खेल रचे मोहन ने,

आय पूतना मारे मोहन मुरली वाले,

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

चौथी खेल रचे मोहन ने,

काले नाग नाथ मार डारे मोहन मुरली वाले,

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

पांचवे खेल रचे मोहन ने,

नख पर गिरिवर धारे मोहन मुरली वाले,

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

छठवीं खेल रचे मोहन ने,

जाए कंस को मारे मोहन मुरली वाले,

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

सब तो कहते कारे कारे,

हमको प्राणों से प्यारे मोहन मुरली वाले,

तेरे खेल है जग से निराले मोहन मुरली वाले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।