कान्हा खोलो मंदिर के द्वार मैं गीता पढ़ने आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा खोलो मंदिर के द्वार मैं गीता पढ़ने आई,

मैं गीता सुनने आई मैं दर्शन करने आई.....

ससुरा को साथ में लाई सासुल को साथ में लाई,

इनका करना बेड़ा पार मैं गीता पढ़ने आई,

कान्हा खोलो मंदिर के द्वार.....

जेठा को साथ में लाई जिठानी को साथ में लाई,

इनको देना आशीर्वाद मैं गीता पढ़ने आई,

कान्हा खोलो मंदिर के द्वार.....

देवर को साथ में लाई देवरानी साथ में लाई,

इनकी गोदी में दो नंदलाल मैं गीता पढ़ने आई,

कान्हा खोलो मंदिर के द्वार.....

नंदुल को साथ में लाई सखियां भी सारी आई,

इनको घर वर दो घनश्याम मैं गीता पढ़ने आई,

कान्हा खोलो मंदिर के द्वार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।