नमामि द्वादश ज्योर्तिलिँगम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नमामि द्वादश ज्योर्तिलिँगमः

नमामि उमापति सोमनाथम् ,

नमामि गौरीपति मल्लिकार्जुनम् ,

नमामि गिरिजापति महाकालेश्वरम् ,

नमामि भवानीपति ओमकारेश्वरम् ,

नमामि सतीपति वैद्यनाथम् ,

नमामि पार्वतीपति भीमाशँकरम् ,

नमामि दक्षसुतापति रामेश्वरम् ,

नमामि त्रिलोकपति नागेश्वरम् ,

नमामि काशीपति विश्वनाथम् ,

नमामि आर्यापति त्रयम्बकेश्वरम् ,

नमामि पशुपति केदारनाथम् ,

नमामि देवमातापति घुश्मेश्वरम् ,

नमामि द्वादश ज्योर्तिलिँगम

रचनाकारः ज्योति नारायण पाठक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।