मस्त मलांग करे मस्त मलंग

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नशा नाम दा पिला दे मेनू मस्त बना दे,

एसी तू प्यार दी चरादे मेनू तू भंग,

मस्त मलांग करे मस्त मलंग,

शीश विच तेरे पाई शीत लहर वग दी,

बुझ दी प्यास एह्नु पिके सारे जग दी,

तन ते भभूती तेरे सावला है रंग,

मस्त मलांग करे मस्त मलंग,

शिव भोले शंकर ते कई तेरे नाम ने,

उचिया पहड़िया दे वीच तेरे धाम ने,

दर उते आके हॉवे हर पूरी मांग,

मस्त मलांग करे मस्त मलंग,

करदे सलीम तेरा रमेश तेरा जाप ने,

नाम विच रंग तेरे धो हुँदै पाप ने,

कंठ विच वस जाये सूरा दी तरंग,

मस्त मलांग करे मस्त मलंग,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।