कैसे द्वार तुम्हारे आऊं रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं रे,

हे पावन परमेश्वर मैं तो मन ही मन शरमाऊं रे....

तूने मुझको जग में भेजा देकर निर्मल काया रे,

आकर के संसार में मैंने इसको दाग लगाया रे,

जन्म जन्म की मैली चादर कैसे दाग छूड़ाऊ रे,

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं रे.....

निर्मल वाणी पाकर तुमसे नाम ना तेरा गाया रे,

नैन मूंदकर हे परमेश्वर कभी ना ध्यान लगाया रे,

मन वीणा की तारें टूटी अब क्या गीत सुनाऊं रे,

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं रे.....

इन पैरों से चलकर तेरे मंदिर कभी ना आया रे,

जहां-जहां हो पूजा तेरी कभी ना शीश झुकाया रे,

हे श्यामा मैं हार के आया अब क्या हार चढ़ाऊं रे,

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।