हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,

हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......

ग्यारस के दिन चौका देवें आले दिवाले वह झाड़े,

या करनी से बनी मकड़ी, जाल पूर्ति वह फिरती,

सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,

हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......

ग्यारस के दिन कपड़ा धोवे जल में मैल रमा देती,

या करनी से बनी है मछली पेट पकड़कर वह रहती,

सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,

हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......

आए गए का आदर ना करती भूखे को भोजन ना देती,

या करनी से बनी है कूतिया घर-घर झांकत वह फिरती,

सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,

हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......

सूरज सोनी कुल्ला करता तके पराई जोनारी,

या करनी से बना कोड़िया दर दर मारा वह फिरता,

सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,

हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......

आए गए का आदर करती भूखे को भोजन जो देती,

या करनी से बनी राधिका श्री कृष्ण के संग रहती,

सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,

हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......

मां बहन का आदर करता तके ना पराई जो नारी,

या करनी से बना कृष्ण जी राधा के संग वो रहता,

सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,

हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।