श्याम जी ना जगे जगाए से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सोए गए कुंभकरण की नींद श्याम ना जगे जगाए से,

श्याम ना जगे जगाए से हरि जी ना जगे जगाए से....

श्याम तोहे दुनिया टैर रही रे,

बाट भारत में देख रही रे,

आके इनके दुख मिटाओ, दुख ना मिटे मिटाए से,

दुख ना मिटे मिटाए से, कष्ट ना कटे कटाये से....

श्याम तोहे मीरा टैर रही रे,

बाट प्याले में देख रही रे,

ऐसे सोए गए चादर तान, अमृत बने ना बनाए से....

श्याम तोहे द्रोपत टैर रही रे,

बाट भरी सभा में देख रही रे,

ऐसे सोए गए चादर तान, चीर ना बड़े बढ़ाए से.....

श्याम तोहे नरसी टैर रहे रे,

बाट जूनागढ़ देख रहे रे,

ऐसे सोए गए चादर तान, भात ना भरे भराए से.....

श्याम तोहे भक्त टैर रहे रे,

बाट सत्संग में देख रहे रे,

आके इनको दरस कराओ के दर्शन मिले ना मिलाए से......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।