जब सर पे बाबोसा का हाथ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - गली में आज चाँद निकला

जब सर पे बाबोसा का हाथ, फिकर फिर क्यू करे,

तेरी बिगड़ी बनेगी हर बात, तू दुनिया से क्यों डरे,

जब सर पे बाबोसा का हाथ.....

सुख दुख का बाबोसा सहारा,

दुखियो का ये पालनहारा,

बनके साया चले ये दिन रात,

तू दुनिया से क्यों डरे,

जब सर पे बाबोसा का हाथ.....

रख इनपे पूरा भरोसा,

हारने न देगे बाबोसा,

देगा खुशियो की ये सौगात,

तू दुनिया से क्यों डरे,

जब सर पे बाबोसा का हाथ.....

करदे अर्पण "दिलबर" जीवन,

फिर सुलझे तेरी हर उलझन,

रिया होगी कृपा की बरसात,

तू दुनिया से क्यों डरे,

जब सर पे बाबोसा का हाथ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।