पार्वती दे बूहे आगे शिवा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पार्वती दे बूहे आगे शिवा ने नाथ बजाया,

देखो लढ़ा गोरा दा चढ़ बेल ते आया,

केडा है लढ़ा केहड़े बाराती,

सारियां ने ढोल वंगु तिड लम्काए ने ,

मढ़िया दे भूत वी बाराती बन आये ने,

गोरा तेरी किस्मत खोटी ऊठ दे गल विच पाया मोती,

नारद मुनि विचोला बन के एहे की जुलम कमाया,

देखो लढ़ा गोरा दा ........

आओ नी सइयो गोरा नु कहियो,

राजे दा जवाई लगदा सहनु कंगाल नही ,

काली जाही शकल ते चिट्टे चिट्टे बाल नही,

गोरा तेरी किस्मत खोटी ऊठ दे गल विच पाया मोती,

नारद मुनि विचोला बन के एहे की जुलम कमाया,

देखो लढ़ा गोरा दा ........

देखो नी लढ़ा जिहडा गज दा निगाडा,

देखो इस भूढ़े ने स्वांग की रचाया है,

साप विछु धुएं बी बाराती ले आया है,

गोरा तेरी किस्मत खोटी ऊठ दे गल विच पाया मोती,

नारद मुनि विचोला बन के एहे की जुलम कमाया,

देखो लढ़ा गोरा दा ........

देखो नि गोरा तेरा आ गया लढ़ा,

हाथ विच कमादल ते गल विच माला है ,

लम्बे लम्बे बाल जिहदे रंग उसदा कला है,

गोरा तेरी किस्मत खोटी ऊठ दे गल विच पाया मोती,

नारद मुनि विचोला बन के एहे की जुलम कमाया,

देखो लढ़ा गोरा दा ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।