नच-नच वृंदावन आँवा मेरे मोहना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नच-नच वृंदावन आँवा मेरे मोहना,

नच नच वृंदावन आवा,

खुशियाँ च फुल्ली ना समावा मेरे मोहना,

नच नच वृंदावन आवा,

राधे राधे-राधे राधे-गाँवा....

जन्मदिवस, मेरे मोहन दा आया,

भगता नू तू आप बुलाया,

रज-रज दर्शन पाँवा मेरे,

मोहना रज रज दर्शन पाँवा,

नच-नच-वृंदावन आवा मेरे मोहना,

नच नच वृंदावन.......

तू आया मैं शगन मनावा,

लडुवा दा मैं थाल वंडावा,

थाली, आज बजावा मेरे मोहना,

थाली आज बजावा,

नच-नच-वृंदावन आवा मेरे मोहना,

नच नच वृंदावन.......

सब तू करते कारज पूरे,

ना रहे कोई श्याम अधूरे,

लख लख शुक्र मनावां,

नच-नच-वृंदावन आवा मेरे मोहना,

नच नच वृंदावन.......

जिसने वी तेरा नाम धयाया,

मुँह मंगया फल तेथो पाया,

मैं वी तेरी छठी मनावा मेरे मोहना,

मैं वी तेरी छठी मनावा,

नच-नच-वृंदावन आवा मेरे मोहना,

नच नच वृंदावन.......

सखियाँ नाल मै दर तेरे आवा,

तेनू अपनी, गोद खिडावा,

खुशियाँ इच फुली ना समावामेरे मोहना,

खुशियाँ इंच फुल ना समावा,

नच-नच-वृंदावन आवा मेरे मोहना,

नच नच वृंदावन.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।