चातुर्मास विदाई

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

( चातुर्मास पश्चात विहार गीत )

छोड देंगे आज यह नगरी,

वह घडी अब आ गई,

आज लेंगे हम विदाई,

वह घडी अब आ गई,

छोड देंगे....

जितना तुमने स्नेह दिया,

वह कभी ना भुलेंगे,

इतना सबने प्रेम दिया,

वह भूलकर ना भूलेंगे,

आज तुम सबसे विदा हो,

वह घडी अब आ गई,

छोड देंगे....

त्याग करके मोह ममता,

चल पडे इस राह पर,

धर्म कि हम दिखाने,

चल पडे इस राह पर,

आज तुमसे ले विदाई,

वह घडी अब आ गई,

छोड देंगे....

तुम सब रहना हिलमिल कर,

यह आशीष हमारा है,

पाते रहना खुशियां हर पल,

यह शुभ आशीष हमारा है,

आज तुमसे ले विदाई,

वह घडी अब आ गई,

छोड देंगे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।