हरिदास के बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( वो गुल किस काम का

जिस गुल में खुशबु ना हो,

वो दिल किस काम का,

जिस दिल में बिहारी जी तू ना हो। )

हरिदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो,

कोई नहीं है मेरा,

आकर मुझे बचालो,

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो….

चौखट पे तेरी बैठा,

विश्वास को जगाये,

कही बुझ ना जाये दीपक,

आकर इसे सम्भालो,

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो….

दुनिया की खाई ठोकर,

अब तक मिला ना दर,

दर दर से हूँ निकाला,

इस दर से ना निकालो,

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो….

बदनाम करके छोड़ा,

अपने हुऐ बेगाने,

कहाँ जाके मुँह छुपाऊँ,

कमली में तुम छुपालो,

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो….

तेरे नाम करके जीवन,

आया शरण तिहारी,

छिपते क्यों हो मुझसे,

पर्दा जरा हटालो,

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो….

माना नहीं हूँ काबिल,

फिर भी तुम्हारा पागल,

'गोपाल'के सांवरिया,

चरणों में अब बिठालो,

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो….

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो,

कोई नहीं है मेरा,

आकर मुझे बचालो,

हरीदास के बिहारी,

मुझको गले लगालो….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।