ध्यान राखजो रे भाया फिर ना पड़ेगी

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॥ पावन पाठ ॥

घणी दूर सु आयो कोरोना भारत में क्यों आज,

अररर भारत में क्यों आज,

ध्यान राखजो रे भाया, फिर ना पड़ेगी मार,

लोग लुगायाँ बोले, मारे ओ कई करसी, मुँह पे मास्क नाही, ख़ासी यो करसी, हाथ पैर थारा दुखे भाया, हो जाओ तैयार,

अररर... ध्यान राखजो रे भाया फिर ना पड़ेगी मार....

चाइना सु चाल्यो कोरोना, सब डरशि,

हर पल मोता तैयार, वटे हड़कम मचसी,

नहीं दवाया नहीं सिलेंडर, काम आवे आज,

अररर... ध्यान राखजो रे भाया फिर ना पड़ेगी मार....

मोदी जी समजावे, दुरी और करसी ,

सेनेटाइजर सब हाथ, मास्क और लगसी

तीसरी डोस लगालो भाया, बच जावोला आज,

अररर... ध्यान राखजो रे भाया फिर ना पड़ेगी मार....

धरम तंवर समजावे, कोरोना नहीं जासी,

सिटी रेवो चाहे गांव, सब बीमार करसी, कान खोल ने सुनलो भाया, सावधानी हो आज,

अररर... ध्यान राखजो रे भाया फिर ना पड़ेगी मार....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।