अमृत की बरस रही बदरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय हो जय हो जय जय जय माँ,

अमृत की बरस रही है बदरिया,

अमृत की बरस रही है बदरिया,

अमृत की बरस रही है बदरिया,

अमृत की बरस रही है बदरिया,

माँ के दुवरिया रे मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया,

मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया.....

पवन का झोका झूला झुलाये,

पवन का झोका झूला झुलाये,

देव ऋषिगण आरती गाये,

देव ऋषिगण आरती गाये,

पवन का झोका झूला झुलाये देव ऋषिगण आरती गाये,

चाँद सूरज बने खड़े है पहरिया,

चाँद सूरज बने खड़े है पहरिया,

माँ के दुवरिया रे मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया,

मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया......

कानन में सोने के कुण्डल,

कानन में सोने के कुण्डल,

माथे पे बिंदिया चमके चमचम,

माथे पे बिंदिया चमके चमचम,

कानन में सोने के कुण्डल माथे पे बिंदिया चमके चमचम,

ब्रह्मा विष्णु शिव जी उतारे नजरिया,

ब्रह्मा विष्णु शिव जी उतारे नजरिया,

माँ के दुवरिया रे मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया,

मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया......

अद्भुत प्यारी माँ की झलक है,

अद्भुत प्यारी माँ की झलक है,

दर्शन की सबके मन में ललक है,

दर्शन की सबके मन में ललक है,

अद्भुत प्यारी माँ की झलक है दर्शन की सबके मन में ललक है,

दर्शन को आई है सारी नगरिया,

दर्शन को आई है सारी नगरिया,

माँ के दुवरिया रे मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया,

मेरी शेरावाली माँ के दुवरिया मेरी मेहरावली माँ के दुवरिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।