चाहे दुःख पाऊं मै चाहे सुख पाऊं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चाहे दुःख पाऊं मै चाहे सुख पाऊं मै झंडेवाली तेरा ध्यान करता रहूं,

बस यही आरजू है भवानी मेरी उम्र भर तेरा गुणगान करता रहूं,

चाहे दुःख पाऊं मै चाहे सुख पाऊं मै झंडेवाली तेरा ध्यान करता रहूं......

कितनी मुश्किल हो जीवन में परवाह नहीं,

मुश्किल से कभी मै तो डरता नहीं,

इतना आशीष दो माँ सदा मुश्किलें तेरी कृपा से आसान करता रहूं,

चाहे दुःख पाऊं मै चाहे सुख पाऊं मै झंडेवाली तेरा ध्यान करता रहूं......

रास्तों की नहीं मुझको कोई फ़िक्र जब तलक तेरे चरणों में है मेरा सर,

मंजिले तेरे चरणों से पाता रहूं इतनी अरदास तुमसे मै करता रहूं,

चाहे दुःख पाऊं मै चाहे सुख पाऊं मै झंडेवाली तेरा ध्यान करता रहूं.....

झूठ की रोटी से ना मै गुजर करूँ दीं दुखियो की हर पल फ़िक्र मै करूँ,

शर्मा सब के दुःख बाँटता ही रहे संजय सब को ही सुख बांटता रहे,

चाहे दुःख पाऊं मै चाहे सुख पाऊं मै झंडेवाली तेरा ध्यान करता रहूं,

बस यही आरजू है भवानी मेरी उम्र भर तेरा गुणगान करता रहूं,

चाहे दुःख पाऊं मै चाहे सुख पाऊं मै झंडेवाली तेरा ध्यान करता रहूं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।