नैना टपके नीर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

थासूं नेह लगाय के, नैना टपके नीर,

थार दर्शन के बिना, हिवड़ो धरे ना धीर,

ओ जी श्याम थारी, ओलूंड़ी घणी आव, म्हारा श्याम,

ओ जी श्याम थारी, ओलूंड़ी घणी आव,

म्हारा श्याम, म्हारा श्याम जी ओ जी म्हारा श्याम.......

ना कुछ भी मैं मांगसूं, श्याम तू क्यूं सकुचाय,

राजी होकर देवरयो, माथे लेऊं लगाय,

ओ श्याम मैं तो दर्शन की प्यासी म्हारा श्याम,

ओ श्याम मैं तो दर्शन की प्यासी म्हारा श्याम,

म्हारा श्याम जी, ओ जी म्हारा श्याम.......

आशा निराशा के झूलने, झूल रही हूं श्याम,

तू ही बता मेरी भूल न, भूले क्यों न श्याम,

ओ श्याम म्हाने पलकां में, छुपा ल्यो म्हारा श्याम,

ओ श्याम म्हाने पलकां में, छुपा ल्यो म्हारा श्याम,

म्हारा श्याम जी, ओ जी म्हारा श्याम.......

एक बार तो सांवरा, सुपने में भी आय,

तड़प रही थारी टाबरी, मत ना जीव दुखाय,

ओ जी श्याम थां बिन हिवड़ो उचट्यो जावे म्हारा श्याम,

ओ जी श्याम थां बिन हिवड़ो उचट्यो जावे म्हारा श्याम,

म्हारा श्याम जी, ओ जी म्हारा श्याम.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।