हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

जय हो मेरे शीश के दानी जग में तेरी अमर कहानी,

जय हो मेरे शीश के दानी जग में तेरी अमर कहानी,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है......

कलयुग में तेरी महिमा भारी लखदातारी तू बलकारी,

कलयुग में तेरी महिमा भारी लखदातारी तू बलकारी,

पूजे तुझको दुनिया सारी मन के मोहे सूरत थारी,

पूजे तुझको दुनिया सारी मन के मोहे सूरत थारी,

कलयुग में तेरी महिमा भारी लखदातारी तू बलकारी,

पूजे तुझको दुनिया सारी मन के मोहे सूरत थारी,

पूजे तुझको दुनिया सारी मन के मोहे सूरत थारी,

भक्तो को हर बाबा का तूने संकट निवारा है,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

छोड़ के सारे जग के सहारे जो भी आया तेरे द्वारे,

छोड़ के सारे जग के सहारे जो भी आया तेरे द्वारे,

तुमने उसके भगय सवार जिसने पकड़े चरण तुम्हारे,

जिसने पकड़े चरण तुम्हारे जिसने पकड़े चरण तुम्हारे,

छोड़ के सारे जग के सहारे जो भी आया तेरे द्वारे,

तुमने उसके भगय सवार जिसने पकड़े चरण तुम्हारे,

जिसने पकड़े चरण तुम्हारे जिसने पकड़े चरण तुम्हारे,

जय जय श्री बाबा जिसने पुकारा है,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है…….

जो प्रेमी खाटू आकर बाबा का निशान चढ़ाते,

बाबा का निशान चढ़ाते बाबा का निशान चढ़ाते,

ये शीश के दानी के चरणों में आकर सर को झुकाते,

आकर सर को झुकाते आकर सर को झुकाते,

जो प्रेमी खाटू आकर बाबा का निशान चढ़ाते,

ये शीश के दानी के चरणों में आकर सर को झुकाते,

आकर सर को झुकाते आकर सर को झुकाते,

हार के गिरी तेरे चरणों में आया है,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

जय हो मेरे शीश के दानी जग में तेरी अमर कहानी,

जय हो मेरे शीश के दानी जग में तेरी अमर कहानी,

हारे के सहारे हमें तेरा ही सहारा है,

खाटू वाले श्याम तू तो हारे का सहारा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।