जन्म कल्याणक पार्श्व प्रभु का

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॥ पावन पाठ ॥

जन्म कल्याणक पार्श्व प्रभु का,

तीन लोक के नाथ विभु का,

आओ मिल ध्यान करे, पार्श्वनाथ दादा का,

जन्म कल्याणक.....

पोष दशम की शुभ बेला, वारणासी में आई है,

अश्वसेन महाराजा घर, गूँज रही शहनाई है,

त्रिभुवन में छाया हर्ष अपार,

सब मिल करे जय जयकार,

नाम से जिनका, कष्ट मिटे सबका,

जन्म कल्याणक.....

धरती पे चाँद उतर आया, ऐसा गजब नजारा है,

पालने में देखो झूल रहा, वामा का दुलारा है,

मैया के हाथ मे रेशम की डोर,

ता ता थैया नाचे मन का मोर,

देव देवी नर ओर नारी, गावे गुण प्रभु का,

जन्म कल्याणक.....

नाकोड़ा हो या शखेंश्वर, समेत शिखर या नागेश्वर,

शंकर जैसे कंकर में, पारस वैसे पत्थर में,

रोम रोम ओर कण कण में,

अणु अणु, परमाणु में,

दिलबर ओर अनिल, गावे गुण प्रभु,

जन्म कल्याणक.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।