गौधन को रखवालो संत सिंगाजी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गौधन को रखवालों संत सिंगाजी कवय गयो रे,

गवलय समाज को बेटो जगत मे नाम कमय गयो रे.....

जेने खजूरी मे जनम लियो रे, माँ गउर को दूध पियो रे,

बाबा भीमाजी को लाल, भाई लिंबाजी कवई गयो रे,

गवलय समाज को बेटो.....

जेने निर्गुण भक्ति करी रे, जेने मूठ के पाछे करी रे,

रणगाँव का धोबी को नाम माटी मे मिले गयो रे,

गवलय समाज को बेटो......

गुरु मनरंगगिर को चेलो, सूरा मे सूरो अकेलो,

म्हारा संत सिंगाजी महाराज गुरु की टेक निभय गया रे,

गवलय समाज को बेटो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।