तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम्हीं में ये जीवन,

जिए जा रहा हूँ,

जो कुछ दे रहे हो,

लिए जा रहा हूँ,

तुम्ही में ये जीवन,

जिए जा रहा हूँ.....

तुम्हीं से चला करती,

प्राणों की धड़कन,

तुम्हीं से है चेतन,

अहंकार तन मन,

तुम्हीं में ये दर्शन,

तुम्हीं में ये दर्शन,

किए जा रहा हूँ,

जो कुछ दे रहे हो,

लिए जा रहा हूँ,

तुम्ही में ये जीवन,

जिए जा रहा हूँ.......

असत के सदा,

आश्रय हो तुम्हीं सत,

तुम्हीं में विषय विष,

तुम्हीं में है अमृत,

पिलाते हो जो कुछ,

पिलाते हो जो कुछ,

पिए जा रहा हूँ,

जो कुछ दे रहे हो,

लिए जा रहा हूँ,

तुम्ही में ये जीवन,

जिए जा रहा हूँ.......

जहाँ भी रहूँ ध्यान,

मैं तुमको देखूँ,

तुम्हीं में हूँ मैं ज्ञान,

मैं तुमको देखूँ,

पथिक मैं ये अर्जी,

पथिक मैं ये अर्जी,

दिए जा रहा हूँ,

जो कुछ दे रहे हो,

लिए जा रहा हूँ,

तुम्ही में ये जीवन,

जिए जा रहा हूँ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।